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  • खोपड़ी बनी शराब का प्याला

    मुहम्मद शैबानी खाँ आरंभ में लुटेरा और भाड़े का सैनिक था ।कुछ समय तक उसने मुगलिस्तान के मंगोल ख़ान के अधीन सेवा की । लेकिन शीघ्र ही मौक़ापरस्त उज़बेक और मज़बूत सैनिकों को आधार बनाकर उसने नया राज्य स्थापित कर लिया । जिसकी बाबर (हुमायूँ के पिता और अकबर के दादा) से भी खूब लड़ाइयां हुई । बाबर को इसने बहुत छकाया था । एक बार तो सुलह की शर्त पर बाबर को अपनी बड़ी बहन ख़ानज़ादा बेगम का ब्याह शैबानी खाँ से करना पड़ा ।यदि यह ख़ुरासान जीत लेता तो ईरान के सफ़वी शासकों की स्थिति भी ख़तरे में पड़ जाती । इसलिए ईरान के शाह इस्माइल सफ़वी को शैबानी ख़ाँ से मुक़ाबला करने के लिए निकलना पड़ा । सन् 1508 ई में मर्व के निकट घमासान लड़ाई हुई । इसमें उज़्बेक सेना बुरी तरह पराजित हुई । इतना ही नही… स्वयं शैबानी ख़ाँ भी लाशों के ढेर पर मृत पाया गया । कहते है कि ईरानी शासक जो सूफी संतों वाली पूर्वज परंपरा से था । मगर एक बार शैबानी ख़ाँ ने ईरानी शासक को दरवेश या भिखमंगा फ़क़ीर कहकर उसका अपमान किया था इसलिये इस लड़ाई के बाद अपने अपमान का बदला लेने के लिए ईरानी शासक इस्माइल सफ़वी ने शैबानी खाँ की खोपड़ी को सोने से मढ़वाकर उसे शराब पीने का प्याला बनवा लिया और उसका उपयोग किया ।